चाह

 #चाह


सखा...
चलो, इस दुनिया के
रीती रिवाज़ से दूर
प्रकृति के गोद में झूम उठे

तेरे हाथ में हाथ डाल के
सारा संसार
घूम आऊं

तेरे गर्म उच्छवास निश्चवास में
खो जाऊं

तेरे नशीले आंखों में अपने आपको
कैद कर लूं

तेरे वक्षस्थल में अपने आपको
दुनिया से छुपालूं

आ चलो,
महसूस करते है ये रात
अब नहीं चाहिए कोई उम्मीद
न कोई वादा
न कुछ और
बस तू, मैं
और ये रात।

( कोई फरक नहीं पड़ता उस पितृ सत्तात्मक व्यवस्था से जो कभी स्त्री के भावनाओं को समझ नहीं पाया)

सरिता

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