भविष्य की यात्रा में एलन मस्क के द्वारा २००२ में स्थापित स्पेस एक्स और नासा का सफ़र

 
? क्या स्पेस एक्स एक गैर सरकारी कंपनी नासा के अंतरिक्ष यात्रीयों को अंतरिक्ष में लेजाकर खोज को एक नई दिशा दे सकती है|

spacex mission in hindi

विश्व की खोज में स्पेस एक्स का योगदान| कई बार चीज़ें नस्ट भी हो जाती हैं| खतरा तो है क्यूंकि यह इतना आसान काम नहीं है|

अंतरिक्ष यात्रा का दूसरा सुनहरा दौर अब स्पेस एक्स के द्वारा शुरू होने वाला है| चाँद पर मनुष्य पहुँच के इक्यावन साल हो चुके हैं| अपोलो मिशन कमियाबी के साथ ख़त्म हुआ|

 

स्पेस शटल के कई कामियाब और दो हादसों के साथ २०११ में इस मिशन बंद हुआ|

Elon Musk Royal Society (crop2)

 

नासा इसके बाद रूस के मदद से अपने अंतरिक्षयात्रियों को ब्रम्हांड में भेजता रहा| अमरिकी अंतरिक्षयात्रियों को अमेरिका के धरती से ब्रम्हांड में भेजने की कोशिश जारी थी| स्पेस एक्स के व्यवस्थापक एलन मस्क कहते है कि यह कामियाब हुआ तो अमेरिकी जनता के लिए गर्व की बात है|

 

spacex kya hai

स्पेस एक्स का पहला प्रयोग राकेट को कैप्सुल के साथ ISS तक भेजकर फ़िर वापस भी लाना होगा|

दूसरा प्रयोग राकेट में तकनिकी गड़बड़ी आने पर राकेट से कैप्सुल को सुरक्षितरूप से अलग करना|

इसके बाद दो अंतरिक्षयात्रियों को ISS तक भेजना|

केन्नेडी स्पेस सेंटर के निदेशक कहते है कि नासा - स्पेस एक्स की राकेट को एक टैक्सी कि तरह इस्तेमाल करेंगे|

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गैर सरकारी गतिविधि से कई सवाल उठते है कि क्या यह मिशन कामियाब होगा ?

 

स्पेस एक्स के कैप्सुल के नाम “ स्टेर्लैनर, ड्रैगन ” २०१९ में ISS तक पांच दिन का सफ़र करके सुरक्षित रूप से लौटना है| १३ फूट दिआमिटर और १६ फूट लंबा यह कैप्सुल एक सात सात लोगों को लेजासकता है|

 

इसे बनाने में कई साल लगा है| अब इसके रिजल्ट्स का इंतेज़ार है|

पहला डेमो ‘फाल्कन ९’ राकेट में “ड्रैगन कैप्सुल” के साथ किया गया है| इसका मकसद यह है कि राकेट “ड्रैगन कैप्सुल” को अंतरिक्ष कि पहली परत में छोड़कर वापस धरती पे आएगा अटलांटिक महासागर में खड़े हुए पानी जहाज पर उतरेगा| इस राकेट को बार-बार इस्तेमाल कियाजाता हैं|

 

नासा के प्रशासन अधिकारी जिम कहते है कि “यह नई शुरुआत है” उदहारण: फुटबॉल क्रीडा की तरह पांच दिन और चलनेवाला हैं|

 

ड्रैगन कैप्सुल आगे बड़कर ISS से डॉक करेगा| डॉक करना मतलब ( जुड़ना ) [ जैसे हम मोबाइल को चार्जर से जुड़ते है उसी तरह जुड़ना ]

 

इस कैप्सुल के अंदर एक मनुष्य जैसी गुड़िया को रखागया है क्यों की अंतरिक्ष यात्रा में मानव शरीर पर होनेवाली पीडन ( गुरुत्वाकर्षण शक्ति, जी फ़ोर्स को माप सके )

 

ड्रैगन कैप्सुल को ISS के पास २० मीटर कि दूरी में थोड़ी देर तक रोकागाया था| ड्रैगन कैप्सुल अपने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस कैमरा से डॉक करने के लिए सही जगह अपने आप ढूँढकर स्वयं जुड़ता है| डॉक करने के लिए १०० पौंड थ्रस्ट का उपयोग किया जाता है|

 

उस समय ISS में पहले से मौजूद कुछ अंतरिक्षयात्री यह सब देख रहे थे और पृथ्वी से संपर्क कर रहे थे| इस कार्य में कुछ गड़बड़ी हुई तो ड्रैगन कैप्सुल अंतरिक्ष के व्याक्कुम में खोजता है| बैकअप व्यवस्था तो है लेकिन हालत बहुत मुश्किल होजाते हैं|

 

सही तरह डॉक होने के बाद ISS से अंतरिक्षयात्री ड्रैगन कैप्सुल के अंदर जाते हैं|

 

पांच दिन बाद ड्रैगन कैप्सुल ISS से अन-डॉक करके ( निकल कर  ) पृथ्वी पर अटलांटिक महासागर में पानी जहाज पर उतरने में छः घंटे लगेंगे|

 

 

ड्रैगन कैप्सुल अंतरिक्ष से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय हीट-शील्ड अधिक तापमान का सामना करना पड़ता है|

 

ड्रैगन कैप्सुल पृथ्वी के वातावरण में पहुँचने के बाद पराशूत गुब्बारों के माध्यम से गति को नियंत्रण किया जाता है|

 

अटलांटिक महासागर में उतारे हुए ड्रैगन कैप्सुल को मोटर बोट-नाव के माध्यम से एक समूह रास्ती के माध्यम से खींचकर पानी जहाज पर लगे हुए क्रेन के माध्यम से कैप्सुल को सुरक्षित रूप से जहाज के डेक पर रखती है|

 

बिना मनुष्य का यह डेमो एक पूर्ण रूप से सफ़ल रहा|

 

 

एलन मस्क कहते हैं कि

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       हमेशा हम पृथ्वी पर ही रहें | किसी एक दिन हमारा अंत भी होजायेगा|

       दूसरा उपाय हम अंतरिक्ष की नागरिकता को अपनाएं कई नये ग्रह की ख़ोज जारी रखें| सब यहीं चाहते हैं|

एलन मस्क जी का जन्म दक्षिण ऑफ्रीका में हुआ था| फ़िर कैनाडा गए और अमेरिका गए|

 

स्पेस एक्स के पहले वाला राकेट “फाल्कन १” तीन बार नाकामियाब रहे| फाल्कन का चौथा प्रयास कामियाब साबित हुआ|

 

२०१५ में फाल्कन ९ कारगो राकेट लॉन्च के कुछ समय बाद टुकड़े – टुकड़े होगया| इसमें नासा का सामान रखा हुआ था यह सब नस्ट होगया| २०१६ में एक और नाकमियाबी|  इस हादसे में ड्रैगन कैप्सुल पूरी तरह नष्ट होगया|

 

फाल्कन ९ कम खर्चीला है| कई लोग यकीन नहीं करते की एक राकेट को सुरक्षित रूप से उतारके फ़िर से इस्तेमाल कर सकते हैं|

 

२०१५ में स्पेस एक्स दुनिया को साबित करके दिखाया है कि फाल्कन ९ को जहाँ से भेजे थे वहीँ पर सुरक्षित रूप से उतरा गया|

falcon 9 rocket hindi

 

फाल्कन ९ राकेट को हर बार थोड़ी मरम्मत करके दस बार उड़ान-उतार कर सकते हैं|

 

स्पेस एक्स आगे चलकर मंगल ग्रह तक भी पहुंचना चाहता है|

 

स्पेस एक्स में यात्रा करने वाले अंतरिक्षयात्री पहनने वाला प्रेशर सूट पर पाँच साल से काम चल रहा हैं| यह अंतरिक्ष में चलने के लिए नहीं | केवल तापमान में अचानक आने वाले बदलाव से सुरक्षित रहने के लिए हैं|

 

स्पेस एक्स के द्वारा बनाये गाये राकेट के अंदर उसे चलाने के लिए दो टच स्क्रीन एल ई डी की सुविधा है| क्यूंकि इस राकेट को आसानी से चलासके| अंतरिक्षयात्री प्रेशर सूट पहनकर, हाथों के ग्लोव्स (मौजे) के माध्यम से भी टच स्क्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं|

 

नासा के द्वारा दिएगए सुझाव के अनुसार स्पेस एक्स के राकेट में “ लॉन्च एस्केप सिस्टम ” सुरक्षा व्यवस्था बनाया जाता है|

 

एक और सुरक्षा व्यवस्था लॉन्च पैड पर तकनिकी समस्या से कुछ हुआ तो कैप्सुल अलग होकर समुन्दर में सुरक्षित रूप से गुब्बारे के माध्यम से उतरता है|

 

अंतरिक्षयात्री राकेट के उडान से कुछ मिनट पहले “ तेल लीक होना या कोई खतरे” से बचना है तो लॉन्च पैड ३९ में २६५ फूट ऊपर बनाये हुए बहुत बड़ी ज़िप लाइन के माध्यम से ३० सेकंड में १२०० फूट दूर जमीन पर पहुन्चादेती है|

 

तूफ़ान के समय महासागर में गिरे हुए कैप्सुल को जल्दी से सुरक्षित करना| एस्केप के समय हजारों पौंड थ्रस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं|

 

 

इस राकेट क्रू ड्रैगन कैप्सुल मेटल ३डी प्रिंटर से जो मशीन चाहिए वह लोहे चीज़ें ३डी प्रिंटर के माध्यम से बनता हैं|

 

इन्फ्लाइट टेस्ट क्या है ?

इस टेस्ट में राकेट उडान करने के ८४ सेकंड के बाद हवा में ४० किलोमीटर ऊपर जाते समय, राकेट का आगे वाला हिस्सा निकल कर २.५ किलोमीटर गति से समुन्दर में २०,००० फीट ऊपर पराशूत के सहारे से सुरक्षित रूप से ५-१० मिनट के बाद उतरना| यह सबक १९८६ जनवरी २८ के हादसे से सीखी गई है| इस परीक्षण के बाद ही नासा अंतरिक्षयात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए इस राकेट का इस्तेमाल करेगा|

 

 





Courtesy credits to DOUG HURLEY

NASA ASTRONAUT

Special thanks to ELON MUSK_SPACEX, NASA & NSC

Courteousness: WYATT CHANNELL, SCOTT LEWERS & CAROLINE PEREZ

 

Typing by manikanta banaganapalli

Published by yesreach blog for education purpose only. Thanking you for Inspiring Us,

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